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लेखनी कहानी -06-Jan-2023

अब तो आ जाओ कहीं से तुम बादल की तरह,
इन्तज़ार तो है तुम्हारा ख़ुदा के फ़ज़ल की तरह।

अबतक घनघोर अंधकार रहा मेरी ज़िन्दगी में,
कब करोगी रौशन मेरा ये जीवन महल की तरह।

बन जाओ तुम प्रेयसी बसा लो अपनी आँखों में,
मेरे नयनों में बस जाओ तुम काजल की तरह।

ना शोर-शराबा ना कोई कोलाहल है मेरे दिल में,
बजाओ कोई मधुर धुन तुम पायल की तरह।

-अभिलाषा  देशपांडे

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3 Comments

Sachin dev

07-Jan-2023 02:21 PM

Lajavab

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Abhinav ji

07-Jan-2023 09:03 AM

Very nice

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VIJAY POKHARNA "यस"

07-Jan-2023 03:51 AM

Awaysome

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